Thursday, July 8, 2010

कटी पतंग!

हवाओं पर डोलती
कतराती, हिचकिचाती
कटी पतंग!

डोर नही तुम्हारी
हाथ किसी के
कटी पतंग!

रंग तुम्हारे दूर से भले
पास नही जगह तुम्हारी
कटी पतंग!

इतनी दूर रहती हो
याद भी न रहे तुम्हारी
कटी पतंग!

8th April 2011